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त्यौहार का मौसम और प्रदूषण – अधिक शोर और कम जश्न!

हर कोई त्योहारों से प्यार करता है। त्योहारों का समय हम अपने दोस्तों और परिवार के साथ अधिक समय बिताते है,  हम अच्छा खाना कहते है और अलग अलग घटनाओं का आनंद लेते है। यह हमारे व्यस्त जीवन शैली से बाहर निकलने और दैनिक चिंताओं के बारे में भूल जाने का समय है।

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या शायद नहीं। त्यौहार के एक रूप से तनाव भी बन गए है। त्योहारों से पहले हम अपने प्रियजनों के लिए सभी उपहार खरीदने और खुद के लिए नए कपड़े खरीदने की जल्दी में होते हैं। रोशनी हर जगह होती  हैं और हम में से कई “तेज रात” के दौरान सो नहीं पाते। त्योहारों में शोर बढ़ जाता हैं। हर जगह पटाखे की आवाज होती हैं और हम बाहर चल रहे पारंपरिक संगीत को भी सुन नहीं पाते। पशु और पालतू जानवरों डरे हुए होते है। अगले दिन, हम सभी दुर्घटनाओं के बारे में अखबारों में पढ़ते है जो ज्यादातर उत्सव के दौरान पटाखों की वजह से होती है। सड़कें कल शाम पार्टी के एक स्मारक के रूप में कचरा से भरी हुई होती  हैं।

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यह अच्छा नहीं है। यह हमारे लिए हानिकारक है और पुराने, बीमार लोगों, छोटे बच्चों, पशुओं और विशेष रूप से हमारे पर्यावरण के लिए हानिकारक है। अफसोस की बात है, त्यौहार हमारे वातावरण में एक बहुत बड़ा प्रदूषण का कारण हैं।

उदाहरण के लिए दीवाली, भारत में मनाया जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है।  सभी आयु वर्ग के लोग पटाखे जलाते है और चोटों के बारे में भूल जाते हैं जो वे अपने स्वयं के स्वास्थ्य के साथ-साथ प्रकृति पर कर रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों से पता चलता है कि दीवाली के दौरान वायु प्रदूषण का स्तर कम से कम 50%  बढ़ जाता है !! पटाखों में  तांबा, कैडमियम, सल्फर, एल्यूमीनियम, बेरियम और दूसरे तरह के तत्व होते हैं। जब एक पटाखा जलाया जाता है, तो यह जहरीले रसायन निकालता है जो एक लंबे समय के लिए हमारी हवा में रहते हैं। पटाखों के कारण स्थायी बहरापन, उच्च रक्तचाप, सोने में अशांति जैसी बीमारी के अलावा,  अचानक जोर से सुनाई शोर से अस्थायी या स्थायी बहरापन या दिल का दौरा पड़ने का जोखिम पैदा होता  है। कल्पना करो यह उन लोगों पर क्या असर करता है जो लंबे समय से अस्थमा और संबंधित रोगों से ग्रस्त हैं । सामान्य तौर पर दीवाली और त्योहारों के दौरान धुंध कार दुर्घटनाओं की एक बड़ी संख्या का कारण है क्योंकि दृश्यता बहुत कम होती  है।

कुत्तों और बिल्लियों के रूप में पालतू जानवर भी पटाखों से पीड़ित हैं। वे मनुष्यों की तुलना में सुनने के प्रति अधिक संवेदनशील होते है जबकि वे हर समय शोर के सामने होते हैं।

दिवाली के एक दिन के बाद, सड़के जले पटाखों और उपहार,  मिठाई बक्सों के रैपिंग कवर  से गन्दी रहती है।  शहर से उत्पादित ठोस अपशिष्ट में त्योहारों के मौसम के दौरान लगभग 25-30% की वृद्धि हो जाती है ।

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त्यौहार उत्सव और मनोरंजन के साथ एक विशेष धार्मिक या सामाजिक उद्देश्य से जुड़े हैं। यह अपने आप से पूछना ठीक है कि क्या हम वास्तव में त्योहारों के दौरान जश्न मनाते है । क्या हम अपने आसपास की सभी व्याकुलता के साथ त्योहारों का उद्देश्य तो नहीं खो रहे हैं? क्या पटाखे जलाना और बहुत शोर मचाना ही त्योहारों का असली मुद्दा है?

त्यौहारों को धुएं में नहीं उड़ा देना चाहिए। हमारे  पास पटाखे फोड़ने और पैसे उड़ाने के अलावा भी कई कई अन्य तरीके हैं जिनसे हम अच्छे तरीके तरह से जश्न मना सकते है। जैसे एक विशेष भोजन, एक अच्छी पुरानी फिल्म देखना या एक परिवार कराओके रात है। इस साल त्योहारों को विभिन्न बनाये। और ना कहे पटाखो को या समारोह को जो लोगों और पर्यावरण को नुकसान पहुचाते है ।

यही वो त्यौहार होगा जो हमें हमेशा याद रहेगा और जो हमारे जीवन में खुशी की चमक लाएगा।

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Translation in Hindi: Shishir Kumar, Member of Vatavaran team

Author:

Vatavaran is a small organization that has decided that it simply must be hands on about the betterment of the world around us. We’re not sitting here for one issue or the other, but for fighting things that bother us in our everyday lives. Basically - we’re determined to make a difference. At the moment, we're working with Solid Waste Management, Water Conservation, our patented Recycling Scheme (WERMS), and e-waste recycling. Join us - we do hands-on work, we do simple and applicable work. We're not fancy, we're not big, we're not famous. We're just working. If you have an idea that you thing deserves to be applied in our daily lives to make a difference, come work with us. At Vatavaran, you lead your own project. It's autonomous work - your idea, your responsibility. We're just the vessel. Because we're cool like that.

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